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Delhi EV Policy 2.0: पेट्रोल टू-व्हीलर पर बैन, क्या चार्जिंग सुविधा तैयार है?

02 May 2026

दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ ट्रैफिक और प्रदूषण के सबसे बड़े संकटों में से एक का सामना कर रही है। मौजूदा समय में दिल्ली की सड़कों पर करीब 87.6 लाख (8.76 मिलियन) सक्रिय वाहन हैं, यानी हर 1000 लोगों पर 500 से अधिक वाहन। इसकेअलावा, रोज़ाना पड़ोसी जिलों से आने वाले वाहनों का दबाव अलग है। सर्दियों में यही स्थिति प्रदूषण को और गंभीर बना देती है।हाल ही में Commission for Air Quality Management द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में 23% योग दान सिर्फ वाहनों से होता है, जो सबसे बड़ा स्रोत है। ऐसे में दिल्ली सरकार की नई EV Policy 2.0 (2026–2030)  इस समस्या का समाधान बनने का दावा कर रही है।

EV पॉलिसी 2.0 का मुख्य उद्देश्य 

दिल्ली सरकार की नई नीति का लक्ष्य है कि शहर में  इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई जाए और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता कम की जाए।

साल 2020 में शुरू हुई पहली EV पॉलिसी के बाद भी आज दिल्ली में  केवल  4.7 लाख (470,104) EVs  हैं, जो कुल वाहनों का करीब 5% ही है। नई पॉलिसीइस हिस्से दारी को तेजी से बढ़ाने पर केंद्रित है।

 पेट्रोल टू-व्हीलर पर बड़ा फैसला

नई ड्राफ्ट पॉलिसी केअनुसार:

  • 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए पेट्रोल टू-व्हीलरकी रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगी
  • कमर्शियलएग्रीगेटर (जैसे डिलीवरी/राइड शेयर) 2026 तक ही BS-VI टू-व्हीलर जोड़ सकेंगे
  • 1 जनवरी 2027 से नए थ्री-व्हीलर (ऑटो) केवल इलेक्ट्रिक होंगे

यह कदम सबसे ज्यादा असर टू-व्हीलर सेगमेंट पर डालेगा, क्योंकि दिल्ली में कुल वाहनों का 67% (5.93 मिलियन) हिस्सा यही है।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि यह नीति प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:

  • हमारा लक्ष्य साफ है—प्रदूषण कम करना और लोगों को क्लीन ट्रांसपोर्ट की ओर ले जाना।सब्सिडी और इंसेंटिवइस बदलाव को आसान बनाएंगे।”

 EV खरीदने पर मिलने वाले फायदे

नई EV पॉलिसी में शुरुआतीखरीदारों को खासलाभ दिए जाएंगे:

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी:

  • पहले साल: ₹30,000 तक
  • दूसरे साल: ₹20,000
  • तीसरे साल: ₹10,000

 अन्य फायदे:

  • रोडटैक्स और रजिस्ट्रेशनफीस माफ
  • पुराने BS-IV या उससे पुराने वाहन स्क्रैप करने पर अतिरिक्त इंसेंटिव
  • इलेक्ट्रिकऑटो और छोटे कमर्शियल वाहनों के लिए अधिक सब्सिडी

सरकारी और सार्व जनिक क्षेत्र में बदलाव

नई पॉलिसी के तहत:

  • सभी सरकारी विभाग 6 महीने केअंदर EV अपनाएंगे
  • Delhi Transport Corporation के सभी नए बस इलेक्ट्रिक होंगे
  • स्कूलों को भी धीरे-धीरे अपने वाहनों को इलेक्ट्रिक करना होगा

उद्योग जगत की चिंता

देश के ऑटोमोबाइलसेक्टर की प्रमुख संस्था Society of Indian Automobile Manufacturers ने इस नीति को “मिशन-ओरिएंटेड” बताया है, लेकिन कुछ चिंताएं भी जताई हैं।

SIAM केअध्यक्ष शैलेशचंद्र केअनुसार:

“EV अपनाने के लिए मजबूरी (mandates) नहीं, बल्कि प्रोत्साहन (incentives) ज्यादा प्रभावी होते हैं।”

सबसे बड़ी चुनौती: चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

EV पॉलिसी की सफलता का सबसे बड़ा सवाल है—चार्जिंग सुविधा।

मौजूदा स्थिति:

  • करीब 3,100 चार्जिंग स्टेशन
  • कुल मिला कर 10,000 से कम चार्जिंग पॉइंट
  • करीब 893 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन

लक्ष्य:

  • 18,000 चार्जिंग पॉइंट
  • यानी अभी भी 8,000 से ज्यादा की कमी है।

ज़मीन पर हकीकत

संगम विहार के डिलीवरीएजेंट राधे श्याम प्रसाद बताते हैं:

  • “चार्जिंग स्टेशन कम हैं और कई बार काम भी नहीं करते। दिन में कई बार चार्ज करना पड़ता है और डर रहता है कि कहीं बीच रास्ते में बैटरी खत्म नहो जाए।”

वहीं, CR पार्क के एक EV कार मालिक के लिए स्थिति बेहतर है क्योंकि वे घर और ऑफिस में चार्जकर लेते हैं।

 EV से क्या समस्याएं हल होंगी और क्या नहीं?

विशेषज्ञों का मानना है कि EVs केवल प्रदूषण कम करने का एक हिस्सा हैं।

Indian Institute of Technology Delhi की प्रोफेसरगीतम तिवारी के अनुसार:

  • EVs स्थानी यप्रदूषण कम करते हैं
  • लेकिन ट्रैफिक जाम की समस्या हल नहीं करते
  • अगर बिजली कोयले से बनेगी, तो कुल प्रदूषण बना रहेगा

उनका कहना है:

लंबे समय का समाधान निजी वाहनों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर शिफ्ट करना है।”

 अन्य राज्यों और देशों से तुलना

महाराष्ट्र:

  • 2030 तक 30% EV लक्ष्य
  • ज्यादा फोकस इंसेंटिव पर, कम प्रतिबंध

 कर्नाटक:

  • रोडटैक्स में छूट के बाद अब ग्रेडेड टैक्स सिस्टम

 दिल्ली:

  • सीधे पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध
  • मार्केट को मजबूर करके बदलाव लाने की रणनीति

 क्या दिल्ली की रणनीति सफल होगी?

दिल्ली की EV पॉलिसी 2.0 एक आक्रामक (aggressive) रणनीति  है, जो तेजी से बदलाव लाना चाहती है। लेकिन इसकी सफलता तीन चीजों पर निर्भर करेगी:

1. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार

2. EV की लागत और सुविधा

3. लोगों का व्यवहार और अपनाने की इच्छा

दिल्ली की EV पॉलिसी 2.0 प्रदूषण से लड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध और EV को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी निश्चित रूप से बदलाव ला सकती है। लेकिन अगर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं हुआ, तो यह नीति अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएगी।

अंततः केवल EV ही समाधान नहींहै—बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कम निजीवाहन और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत ही दिल्ली को वास्तव में प्रदूषण मुक्त बना सकते हैं।